पत्रिका
शब्द, चिंतन और हमारी यात्रा साझा करने का एक स्थान।

गुरुदेव के प्रवचन
शक्ति की सामर्थ्य, ध्यान का रहस्य और प्राचीन भारत का विज्ञान
वास्तविक आध्यात्मिक शक्ति क्या है और हमारे जीवन में शक्ति की क्या भूमिका है? चेतना की शुद्धि के लिए ध्यान साधना क्यों आवश्यक है और प्राचीन वैदिक परंपराएँ आधुनिक विज्ञान से कैसे जुड़ी हैं? विजयादशमी के दिन भारत और अमेरिका के शिष्यों के साथ ऑनलाइन संवाद — ऊर्जा, चेतना, कर्म, गौ सेवा और प्राचीन भारतीय ज्ञान के वैज्ञानिक अध्ययन पर। इसमें कुंडलिनी शक्ति और तीन ग्रंथियों पर निर्देशित ध्यान तथा शब्दावली भी शामिल है।
आगे पढ़ें →
गुरुदेव के प्रवचन
प्रश्नोत्तर
एक लाइव कॉल का प्रतिलेख, जिसमें गुरुदेव शिष्यों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं — स्वतंत्र इच्छा और कर्म से लेकर क्वांटम भौतिकी और माया तक, और मनुष्य की दस क्रियाओं तथा पूर्ण ज्ञान के मार्ग तक। इसमें दस क्रियाओं की शिक्षा का विस्तृत अवलोकन और शब्दावली भी शामिल है।
आगे पढ़ें →
सेंसेई के प्रवचन
केवल जानना ही पर्याप्त क्यों नहीं है
आध्यात्मिक मार्ग के बारे में सोचने से उसे वास्तव में जीने तक कैसे पहुँचें — और सूचना, तकनीक तथा दैनिक ज़िम्मेदारियों से भरी दुनिया में उसके लिए स्थान कैसे खोजें? Sensei Rajeev Sinha, PhDr. Jiří Kočandrle के साथ बातचीत में स्मृतियों और अहंकार से भरे मन की बात करते हैं, और बताते हैं कि स्रोत की ओर धारा के विपरीत तैरने की छवि का अर्थ जीवन में बस बहते रहने से कहीं अधिक क्यों है।
आगे पढ़ें →
गुरुदेव के प्रवचन
वह व्यवस्था जिसे हमने देखना भूल दिया
गुरुदेव और शिष्यों के बीच एक अनौपचारिक सत्र का प्रतिलेख — अस्तित्व की व्यवस्था, भय और लालच, तथा उस शक्ति पर जो हम जैसे हैं वैसी ही ढल जाती है। बातचीत प्रकृति से मनुष्य के संबंध से होकर, श्रवण और मनन के भेद से गुज़रते हुए, संतुलन की ओर लौटने के रूप में साधना के व्यावहारिक अर्थ तक पहुँचती है।
आगे पढ़ें →
सेंसेई के प्रवचन
कर्म और कर्म भोग के तीन प्रकार
सेंसेई राजीव संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म पर — आसक्ति, कर्तव्य के रूप में चेतावनी और ज़ीरो बैलेंस के अर्थ पर।
आगे पढ़ें →